World AIDS Day – विश्व एड्स दिवस 2023 की थीम क्या है?

World AIDS Day

World AIDS Day– प्रत्येक वर्ष 1 दिसम्बर को विश्व भर में विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों में इस बीमारी के बारे में जागरूकता बधाई जा सके। एड्स एल गंभीर और लाइलाज बीमारी है, जो संक्रामक होती है। दुनियाभर में एड्स ने लाखों को लोगों की जान ले ली है।  आज AIDS दिवस के अवसर पर वर्ष 2023 की थीम के बारे में जानेंगे। पहला एड्स दिवस 1 दिसम्बर 1988 को मनाया गया था पिछले 35 वर्षों में, चिकित्सा अनुसंधान में प्रगति, उपचार और रोकथाम तक पहुंच में वृद्धि और वायरस की व्यापक समझ के कारण एचआईवी और एड्स से निपटने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

World AIDS Day 2023 की थीम

WHO विश्व एड्स दिवस के अवसर पर हर साल कोई ना कोई थीम निर्धारित करता है। इस साल भी 36वें विश्व एड्स दिवस पर WHO ने वर्ष 2023 के लिए “Let Communities Lead” थीम निर्धारित की है। इस थीम को चुनने के पीछे का उद्देश्य लोगों को एड्स के रोकथाम में समाज की अहम भूमिका के बारे में बताना है।

विश्व एड्स दिवस एड्स के रोकथाम की दिशा में समाज की उपलब्धियां का उत्सव मनाने से कहीं अधिक बढ़ कर हैं। इसका उद्देश्य समाज को उनकी नेतृत्वकारी भूमिकाओं में सक्षम बनाना और उनका समर्थन करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है।

एड्स क्या है

एड्स मुख्य रूप से यौन संचारित रोग है हालांकि अन्य कर्म से भी इसके फैलने का खतरा रहता है। कभी-कभी लोगों में एचआईवी और एड्स को लेकर संदेह उत्पन्न हो जाता है कि यह दोनों अलग-अलग रोग हैं। वास्तविकता यह है कि एचआईवी एक वायरस है जिसके संक्रमण से व्यक्ति को एड्स हो सकता है।

एचआईवी वायरस मनुष्य की इम्युनिटी सिस्टम को नुकसान पहुंचा कर शरीर की संक्रामक रोगों से लड़ने की क्षमता को नष्ट कर देता है। यौन संक्रमण के अलावा यह वायरस संक्रमित रक्त चढ़ाने, संक्रमित व्यक्ति को लगे इंजेक्शन का दूसरे व्यक्ति में उपयोग करने से भी फैल सकता है। गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान महिलाओं से उनके बच्चों में भी एचआईवी वायरस से संक्रमित होने का खतरा बहुत होता है।

जब एक बार शरीर में एचआईवी वायरस एड्स के रूप में परिवर्तित हो जाता है तो मुख्य रूप से प्रारंभिक लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, जोड़ों में दर्द होना, मांसपेशियों में दर्द होना, गले में खराश होना, रात में पसीना आना, ग्रंथियां का बढ़ जाना, शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना, जननांगों या गर्दन के पास घाव होना, निमोनिया, थकान, कमजोरी, वजन का अचानक गिरना और शरीर में छाले जैसे लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं।

एड्स से बचाव के उपाय

एचआईवी संक्रमण को रोकने के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है, हालांकि कुछ मेडिकल रिपोर्ट्स में एचआईवी/एड्स के उपचार के ट्रायल का जिक्र मिलता है, फिर भी अभी एड्स को लाइलाज बीमारी ही माना जाता है।  इसलिए एचआईवी संक्रमण से बचाव जरूरी है। हाथ मिलाने, संक्रमित व्यक्ति के छींकने-खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट, संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन करने से ये संक्रमण नहीं फैलता है, इसलिए ऐसे लोगों से किसी तरह का भेदभाव न करें।

एचआईवी कई स्रोतों के माध्यम से फैल सकता है एचआईवी संक्रमित रक्त, वीर्य, योनि स्राव, गुदा तरल पदार्थ और स्तन के दूध सहित शारीरिक तरल पदार्थों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

  • सुरक्षात्मक तकनीकों का उपयोग करना।
  • दूषित सुइयों के उपयोग से बचना।
  • माँ से बच्चे में संचरण को रोकना।
  • अगर किसी को अपने शरीर में संक्रमण के बारे में पता है तो सही उपचार सुनिश्चित करना।
  • शादी से पहले प्री-मैरिटल टेस्ट के सेट का विकल्प चुनना जिसमें एचआईवी टेस्ट शामिल हो, यह साथ ही अन्य यौन संचारित रोगों से सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है।

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